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Saturday, October 17, 2015

दुबेजी के दोहे

तन के इस कुरुक्षेत्र में,
              मन अर्जुन है जान ।
गोविन्द ही हैं आत्मा,
          यह भी गीता-ज्ञान ।।1।।

सुखी रहो आनन्द में,
               जीओ बरस हजार ।
तुम ऐसे फूलो-फलो
                जैसे भ्रष्टाचार ।। 2।।

दीवारों के कान हैं
             पूरा सच यों जान ।
कान संग दीवार में
      चुगलीखोर जुबान ।।4।।

पत्नी के मन में मिलीं,
              दो इच्छाएँ खास ।
बेटा श्रवण कुमार हो,
         पति हो तुलसीदास ।। 3 ।।

यह सच्चाई जानकर,
            आज गये सब काँप ।
कौआ काटे झूठ पर,
      सत्य कहो तो साँप ।।5 ।।

-सुरेन्द्र दुबे (जयपुर)
सम्पर्क : 0141-2757575
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